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कैसे हुआ RCP Singh का पत्ता साफ़,कैसे बचेगा उनका मंत्रीपद, पढ़िए

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दिल्ली: बिहार में कल देर शाम सियासी ड्रामा का सस्पेंस ख़त्म हो गया और जनता दल यूनाइटेड ने झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष खिरु महतो को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है।महतो के उम्मीदवारी से आर सी पी सिंह के सभी उम्मीदों को ज़ोरदार झटका लगा है। हालाँकि क़यास तो पहले से लगाया जा रहा था कि इस बार आर सी पी बाबू का राज्यसभा जाना इतना आसान नहीं होगा लेकिन नीतीश कुमार के बाद ख़ुद को पार्टी में नंबर दो बताने वाले आर सी पी सिंह अंत समय तक अपने लिए हरसंभव प्रयास करते रहे हैं।आर सीपी के समर्थक भी सोशल मीडिया पर यह बताने से नहीं चूके की उनके नेता आर सी पी सिंह ने CM नीतीश और जनता दल यूनाइटेड के लिए क्या कुछ नहीं किया है लेकिन नीतीश कुमार तो नीतीश कुमार है और उनका फ़ैसला वही जाने।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने आर सी पी सिंह की एक न चली और उनका लगातार तीसरी बार राज्यसभा जाने का सपना टूट गया।आर सी पी सिंह फ़िलहाल मोदी कैबिनेट में मंत्री भी है और अगर छह महीने के अंदर वह संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं बनते हैं तो उनकों केंद्रीय मंत्रिमंडल में अपने पद से भी इस्तीफ़ा देना पड़ेगा।मतलब साफ़ है कि सदन की सदस्यता तो गंवानी ही पड़ेगी साथ-साथ मंत्री पद से भी हाथ धोना पड़ेगा। अगर वर्तमान की राजनीतिक स्थिति को देखें तो लगभग यह तय माना जा रहा है कि आर सी पी सिंह अब ना तो राज्य सभा के सदस्य रहेंगे और न ही मोदी कैबिनेट का हिस्सा लेकिन सवाल ये उठता है कि आख़िर अचानक ऐसा क्या हुआ कि आर सी पी सिंह जो कि जनता दल यूनाइटेड में नंबर 2 की हैसियत रखते थे उनको साइड कर दिया गया और राजनीतिक रूप से हास्य पर जाने के बाद आर सी पी बाबू के लिए भविष्य में कौन सी विकल्प बचती है।

भविष्य में आर सी पी सिंह के पास क्या विकल्प बचता है इसको समझने के लिए पहले ये समझना ज़रूरी है कि आख़िर आर सी पी सिंह के साथ खेला कैसे हो गया:

इसलिए कटा RCP का पत्ता:
दरअसल ये वक़्त था साल 2021 का जुलाई का महीना था और मोदी कैबिनेट का विस्तार होने वाला था। 2019 में NDA की सरकार बनने के बाद BJP के रुख़ से ख़फ़ा होकर बिहार के मुख्यमंत्री और तत्कालीन JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने ये फ़ैसला किया कि उनके पार्टी की तरफ़ से कोई भी केन्द्रीय कैबिनेट में शामिल नहीं होगा लेकिन जब 2021 में यह फ़ैसला लिया गया कि अब मोदी कैबिनेट का विस्तार होगा तब उस वक़्त के राष्ट्रीय अध्यक्ष आर सी पी सिंह ने ये फ़ैसला किया कि जनता दल यूनाइटेड केंद्रीय कैबिनेट का हिस्साबनेगी। पटना के देने राजनीतिक जानकारों की मानें तो उस वक़्त बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने पार्टी के लिए 2 मंत्री पद माँग रहे थे लेकिन BJP ने स्पष्ट कर दिया की JDU को एक ही मंत्री पद दिया जाएगा क्योंकि दूसरा मंत्रिपद पाँच सांसदों के साथ लोजपा से बग़ावत करने वाले पशुपति नाथ पारस को दिया जाएगा।जानकारों की मानें तो ये वही समय था जब आर सी पी सिंह और ललन सिंह में मंत्री पद की दावेदारी को लेकर के ठन गई थी।उस वक़्त आर सी पी सिंह नए किसी की परवाह किए बिनाJDU कोटे से केंद्रीय कैबिनेट के लिए अपना नाम प्रस्तावित कर दिया और ललन सिंह का मंत्री बनने का सपना अधूरा रह गया।इसके साथ भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ आर सी पी सिंह की बढ़ती नजदीकियां भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को खटकने लगा और एक वर्ष के अंदर में ये दूरी इतनी बढ़ गई की RCP बाबू को राज्यसभा के सदस्य के साथ साथ मंत्री पद से भी हाथ धोना पड़ रहा है।

RCP के पास अब क्या है विकल्प:
फ़िलहाल आर सी पी सिंह को JDU ने ज़ोरदार झटका दिया है लेकिन वह भी एक मज़े हुए राजनेता है और इतने आसानी से हार नहीं मानेंगे लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि अब आने वाले समय में RCP सिंह के पास कौन सा विकल्प बचता है।
ग़ौरतलब है कि आर सी पी सिंह की राज्यसभा का कार्यकाल जल्द ही पूर्ण हो जाएगा और मंत्री पद पर बने रहने के लिए उनको दोनों सदनों में से किसी एक सदन की सदस्यता तो लेनी ही होगी,साथ-साथ PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की विशेष कृपा की भी आवश्यकता पड़ेगी।लेकिन वर्तमान परिस्थिति में इसकी कम उम्मीद है कि BJP आर सी पी सिंह के कारण बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को नाराज़ करे ,लेकिन राजनीति संभावनाओं का खेल है क्या पता RCP बाबु कुछ बड़ा खेला करदें जिससे भाजपा के आला कमान ख़ुश हो जाए और बख़्शीश के तौर पर उनको केंद्रीय मंत्री पद भेंट कर दे।दूसरा विकल्प आर सी पी बाबू के पास यही है कि वर्तमान में वो पार्टी के निर्णय को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विश्वास को पुनः जीते और सही समय आने पर अपने ही दल के अंदर उनके प्रतिद्वंदी को साइड करते हुए पुनः अपना वर्चस्व स्थापित करें।

हालाँकि राजनीति में विकल्प सम्भावनाओं से उत्पन्न होता है और देश की सियासत में राजनेता अपने सुविधा अनुसार अपनी संभावनाओं की तलाश कर ही लेते हैं अब भविष्य में देखना दिलचस्प होगा कि RCP सिंह अपनी सियासत को बचाने के लिए कौन सी संभावनाएं तलाशते हैं और कौन सा विकल्प अपनाते हैं

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